छोटा घेरा — The smaller ring.
दूसरा पाठ — एक गुरु अपने चंचल शिष्य को लेकर आया। ध्यान बाँधने का सूत्र, और तीन कदम।
एक गुरु ने आकर कहा — मेरा शिष्य बुद्धिमान है, पर एक घंटे भी एक ही शास्त्र पर नहीं टिकता। पहले अर्थशास्त्र, फिर धनुर्वेद, फिर काव्य। कुछ पकड़ता नहीं, सब छोड़ देता है।
सूत्र —
एकाग्रता न बलात्, न बहुधा; लघुवृत्तेन सा बध्यते।
(Attention is not won by force, nor by many things; it is bound by a small circle.)
तीन कदम —
पहला, आज उसे एक ही श्लोक दे। वह उसे लिखे, बोले, समझे, फिर तुम्हें समझाए। उसके सारे संसार को एक श्लोक में सिमटने दो।
दूसरा, कल वही श्लोक ले, पर उस पर एक प्रश्न बनाए — सिर्फ एक। उस प्रश्न को पूरे दिन अपने साथ रखे, जैसे कोई छोटा पत्थर मुट्ठी में।
तीसरा, जब सात दिन तक वह एक ही श्लोक पर टिका रहे, तब उसे दूसरा श्लोक दो — पर पुराने को छोड़े नहीं। दोनों को साथ रखे। घेरा बढ़ेगा, पर टूटेगा नहीं।
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