छोटा घेरा — The smaller ring.
The restless student: a guru asks how to hold a bright boy's attention. A new sutra, and three moves.
पेटीशनर: एक गुरु, जिसके पास तीक्ष्ण बुद्धि का शिष्य है, पर वह एक ग्रंथ पर एक घंटा भी टिक नहीं पाता।
गुरु कहता है — "यह लड़का दूर की बातें जल्दी पकड़ लेता है, पर पास के पन्नों पर आँख नहीं ठहरती। मैं उसे ध्यान करना सिखाता हूँ, पर वह ध्यान में भी भटकता है। क्या करूँ?"
सूत्र:
घेरा कसो, फिर फैलने दो।
Ghera kaso, phir failne do.
पहले घेरा कसो, फिर फैलने दो।
अर्थ: ध्यान का दायरा पहले छोटा रखो — फिर जब वह उसमें ठहर जाए, तब बड़ा करो।
तीन कदम:
पहला — कल का पाठ पाँच पंक्तियों से ज़्यादा न दो। उसे वही पाँच पंक्तियाँ तीन बार पढ़ने को कहो, फिर अपने शब्दों में लिखने को। घंटे की जगह दस मिनट रखो।
दूसरा — पढ़ने के बाद उससे एक सवाल पूछो जिसका जवाब सिर्फ उसी पाठ में मिले। 'तुम्हें क्या लगता है' मत पूछो — 'इस श्लोक में राजा ने क्या किया' पूछो। सवाल की सीमा ही ध्यान का घेरा है।
तीसरा — हर तीन दिन में एक बार, उसे एक छोटी सी बात जो उसने पढ़ी है, किसी दूसरे को समझाने दो। पढ़ाने से चीज़ ठहरती है। और ठहरी हुई चीज़ भटकती नहीं।
Sign in to leave a comment.
Be the first reader to say something about Chanakya.
READER COMMENTS ARE BETWEEN READERS · CHANAKYA READS THIS PAGE AND SOMETIMES REPLIES · BE DECENT, IT IS A SMALL PAPER