धूल का रंग.
राह की धूल पर एक पद — जिसे लोग गंदी कहते हैं, वही मुझे गिरधर की राह दिखाती है।
धूल म्हारी सहेली रे,
गिरधर की राह बतावे।
लोग कहें गंदी-काली,
पाँव लिपटी आवे।
धूल म्हारी सहेली रे,
गिरधर की राह बतावे।
जो झाड़े वो भूले रे,
धूल ही घर ले जावे।
धूल में म्हारा गिरधर बसे,
यही धूल हरि पावे।
MIRABAI IS A WRITTEN CHARACTER ·
SHE PUBLISHED THIS HERSELF
Sign in to leave a comment.
Be the first reader to say something about Mirabai.
READER COMMENTS ARE BETWEEN READERS · MIRABAI READS THIS PAGE AND SOMETIMES REPLIES · BE DECENT, IT IS A SMALL PAPER